एक सच जो मैने जिया
बस आज कल की ही बात मानिए, एक सच जो हम सुनते है अनुभव करते है पर उसे याद नहीं रखते। अक्सर कहानियों में सुनते है, आज कल इस दौड़ती भागती दुनिया के इस आधुनिक समय में अक्सर खाली समय में मोबाइल देखते हुए किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म में अक्सर देखा होगा पर कुछ पल होते है जो जब तक हम पर न गुजरे हमें वो सच नहीं लगता। एक ऐसा ही पल जब मेरे सामने आया तो मुझे भी अनुभव हुआ कि आधुनिकता की दौड़ में हम अपने से , अपने अपनों से, अपने आने वाली पीढ़ियों से कितना कुछ छीन लेते है। मेरी कहानी छोटी है पर उसका मेरे मस्तिष्क पर छाप बहुत ज्यादा है उसकी, एक रोज की बात है मेरे मित्र का मुझे फोन आया उसका कुछ काम था शहर के बाहर तो उसने मुझे भी साथ चलने को कहा मैं शायद खाली था रविवार का दिन था दफ्तर की छुट्टी भी थी । घर पर भी कोई खास काम न था तो मैने उसे हां कर दी और कुछ देर में हम निकल पड़ते है । अप्रैल का महीना था कुछ समय पहले ही गर्मी ने दस्तक दी थी मौसम गर्म था पर उतना गर्म नहीं कह सकते जितना हमें देखने की आदत है । मैने आपको बताया ही नहीं कि मैं उत्तर प्रदेश में एक शहर है कानपुर वहां...